Thursday, 24 June 2010

आरभ्यते MPhil कार्यम् अधुना

पुस्तकानुवादस्य कार्यं कथञ्चित् समाप्तम् अधुना। अस्मिन् मासे यदि MPhil कार्यम् अपि प्रथमलेखनपर्यन्तं वा समाप्नोति तर्हि आनन्द:। अद्यारभ्य सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि नियम्य च मूर्ध्न्याधायात्मन: प्राणम् आस्थास्यामि MPhil-धारणाम्। इदमेव कर्तुं कृतसङ्कल्पोऽस्मि

2 comments:

  1. संस्कृत की सेवा एवं उसे बढ़ावा देने के लिए. आप जो कर रहे है उसके लिए साधुवाद, यहाँ भी आयें और follower बन कर हमारा उत्साह बढ़ाएं. www.upkhabar.in/

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  2. बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना,
    मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
    यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके.समाज में समरसता,सुचिता लानी है तो गलत बातों का विरोध करना होगा,
    हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
    मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

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